गुरुवार, 27 मार्च 2014

लल्लू रिटर्निंग आफिसर - 6 (पगार)

लल्लू रिटर्निंग आफिसर निर्वाचन कार्यालय मे तलब किए गए। हाँफते काँपते लल्लू जी किसी तरह कार्यालय पहुंचे। पूरा दो घंटा लेट पहुंचे थे। दूसरों को डांट पिलाने वाले लल्लू जी की आज जम कर क्लास लग रही थी। पसीना पोंछते बाहर निकले। ओएसडी ने लपका सर, क्या हुआ ? आज फिर लेट पहुंचे? लल्लू रिटर्निंग आफिसर : अरे क्या बताऊँ ? मेरी तो किस्मत ही खराब है। ऊपर से चुनाव ने उसे और भोथरा बना दिया। ओएसडी : वो कैसे सर? लल्लू रिटर्निंग आफिसर : काम वाली भाग गई। मैडम ने फरमान सुना दिया इसलिए आज उसका सारा काम मुझे ही करना पड़ा। ओएसडी: आपको क्यों करना पड़ा सर, और काम वाली बाई भाग क्यों गई? लल्लू रिटर्निंग आफिसर: वो मैडम को रोज पगार बढ़ाने की बात कर रही थी। मैंने नहीं बढ़ाई। इसलिए बाई तो भाग ही गई, मैडम ने आरोप मेरे सर डालते हुये घर मे स्ट्राइक कर दिया। सो आजकल चौका-बर्तन और झाड़ू-पोंछा सब मेरे जिम्मे आ गया है। ओएसडी: सर लेकिन आपके लिए दो चार सौ रुपये तो मामूली बात है। बढ़ा देते पगार या कम से कम बढ़ाने का वादा ही कर देते ! लल्लू रिटर्निंग आफिसर : आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण मैं न तो उसकी पगार बढ़ा सका और न ही पगार बढ़ाने की घोषणा ही कर सका...

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