बुधवार, 26 मार्च 2014

लल्लू रिटर्निंग आफिसर - 5 (बत्ती और हूटर)

लल्लू जी का तबादला किसी दूसरे जिले मे हो गया। पास के जिले मे जाना था। तुरंत योगदान करने का हुक्म आया। हाँफते-काँपते अगले दिन शाम को लल्लू अपने कक्ष मे पहुंचे। भीड़ लगी थी, सभी लल्लू जी को देखना चाहते थे। सभी ने इनके किस्से सुने थे। पहला मौका ओएसडी को मिला। ओएसडी पानी पिलाने के बहाने कक्ष मे दाखिल हुये 

ओएसडी : काफी देर से सर का इंतज़ार किया जा रहा था, कही कोई समस्या तो नहीं आई? काफी परेशान से दिख रहे हैं?


लल्लू रिटर्निंग आफिसर (पसीना पोंछते हुये) : अरे मत पुछो, रास्ते मे था, चुनाव आयोग की पीसी चल रही थी। रेडियो पर बात पता चली कि आदर्श आचार संहिता लागू हो गया है। 

 
ओएसडी : सर ये तो सबको पता है। 



लल्लू रिटर्निंग आफिसर: हाँ लेकिन, मेरी गाड़ी पर बत्ती लगी थी और ड्राइवर हूटर बाजा रहा था। 

ओएसडी : तो इसका देरी से कैसा संबंध?
 
लल्लू रिटर्निंग आफिसर : मैं उन संशोधनों को ठीक से नहीं पढ़ सका था जिसमे लाल बत्ती लगाने और हूटर के प्रयोग के संबंध मे निर्देश थे। इसलिए आधे रास्ते से पैदल ही आना पड़ा। 

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