लल्लू रिटर्निंग आफिसर के जिले में एक भी वोट नहीं पड़ा. सभी लोग चिंतित थे. आखिर क्या वजह हो सकती है? लल्लू जी काफी मेहनती थे. रात-दिन एक कर दिया था. चुनाव की तैयारियों में कही कोई कसर न रह जाये इसलिए, कई रात तो ठीक से सो भी नहीं पाए थे बेचारे. गहन पड़ताल जारी थी. बात निर्वाचन आयोग तक पहुंची. निर्वाचन आयोग इस मुद्दे को एक केस स्टडी के तौर पर ले रहा था. लल्लू जी आयोग में तलब किये गए. साथ में मल्लू एसपी भी हो लिए.
अपर निर्वाचन अधिकारी: लल्लू-मल्लू जी, आपलोगों ने जी तोड़ मेहनत की लेकिन हम आपको इसकी बधाई भी नहीं दे सकते. क्या आप बता सकते हैं कि कहाँ कमी रह गई.
मल्लू एसपी : सर जी कमी तो कोई नहीं थी. हमने पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम किया है. मैंने भी कई रात जग कर तैयारियों को मुकम्मल कराया. और लल्लू जी तो बेचारे अपना तकिया और चादर साथ लेकर घूमते थे. कई रात तो हमारी सड़क पर ही गुजरी है.
अपर निर्वाचन अधिकारी : तो फिर ऐसा क्या हुआ कि एक भी मतदाता बूथ तक नहीं पहुंचा? क्या मतदाता जागरूकता कार्यक्रम में कोई गडबडी थी या कोई और बात?
मल्लू एसपी : सर स्वीप कार्यक्रम तो पूरी तरह सफल रहा. हमें जानकारी मिली है कि शाम पांच बजे तक जिले के सभी बूथों पर लोगों की लंबी कतारें थीं.
अपर निर्वाचन अधिकारी ( हैरत के साथ) : फिर ऐसा क्या हुआ कि वोट नहीं पड़ा? कहीं ईवीएम में तो कोई गडबडी नहीं थी?? या फिर वाहन वालो ने कोई पंगा कर दिया???
(निर्वाचन अधिकारी ने सवालों की बौछार लगा दी, मल्लू जी पसीने पसीने हो गए. उन्हें इस तरह परेशान देख लल्लू रिटर्निंग अधिकारी ने साहस के साथ मोर्चा सम्हाल लिया)
लल्लू रिटर्निंग आफिसर : सर जी, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. हमारी तैयारियां फूल-प्रूफ थीं. लेकिन, आपको तो याद ही होगा कि एक आदेश जारी किया गया था जिसके तहत मतदान की तारीख को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई थी.
अपर निर्वाचन अधिकारी : लल्लू जी, फिर तो मतदान का प्रतिशत बढ़ना चाहिए न. लेकिन आपके यहाँ तो एक भी वोट नहीं पड़ा. (अधिकारी ने हैरत जताई !)
लल्लू जी : सर फैक्स मिलते ही मैंने सारे कर्मचारियों और अधिकारीयों को मतदान के दिन के लिए छुट्टी दे दी. और सख्त आदेश भी जारी कर दिया कि अगर एक भी कर्मचारी इस आदेश का उल्लंघन करेगा तो उसे कडा दंड दिया जायेगा. छुट्टी मिल जाने के कारण कोई भी मतदान कर्मी बूथ नहीं जा सका. लोग जब बूथ पर मतदान के लिए पहुंचे तो वहाँ ताले लटके मिले. वोट इसी कारन नहीं पड़े होंगे (लल्लू जी ने मासूमियत दिखाई!)... :
अपर निर्वाचन अधिकारी: लल्लू-मल्लू जी, आपलोगों ने जी तोड़ मेहनत की लेकिन हम आपको इसकी बधाई भी नहीं दे सकते. क्या आप बता सकते हैं कि कहाँ कमी रह गई.
मल्लू एसपी : सर जी कमी तो कोई नहीं थी. हमने पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम किया है. मैंने भी कई रात जग कर तैयारियों को मुकम्मल कराया. और लल्लू जी तो बेचारे अपना तकिया और चादर साथ लेकर घूमते थे. कई रात तो हमारी सड़क पर ही गुजरी है.
अपर निर्वाचन अधिकारी : तो फिर ऐसा क्या हुआ कि एक भी मतदाता बूथ तक नहीं पहुंचा? क्या मतदाता जागरूकता कार्यक्रम में कोई गडबडी थी या कोई और बात?
मल्लू एसपी : सर स्वीप कार्यक्रम तो पूरी तरह सफल रहा. हमें जानकारी मिली है कि शाम पांच बजे तक जिले के सभी बूथों पर लोगों की लंबी कतारें थीं.
अपर निर्वाचन अधिकारी ( हैरत के साथ) : फिर ऐसा क्या हुआ कि वोट नहीं पड़ा? कहीं ईवीएम में तो कोई गडबडी नहीं थी?? या फिर वाहन वालो ने कोई पंगा कर दिया???
(निर्वाचन अधिकारी ने सवालों की बौछार लगा दी, मल्लू जी पसीने पसीने हो गए. उन्हें इस तरह परेशान देख लल्लू रिटर्निंग अधिकारी ने साहस के साथ मोर्चा सम्हाल लिया)
लल्लू रिटर्निंग आफिसर : सर जी, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. हमारी तैयारियां फूल-प्रूफ थीं. लेकिन, आपको तो याद ही होगा कि एक आदेश जारी किया गया था जिसके तहत मतदान की तारीख को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई थी.
अपर निर्वाचन अधिकारी : लल्लू जी, फिर तो मतदान का प्रतिशत बढ़ना चाहिए न. लेकिन आपके यहाँ तो एक भी वोट नहीं पड़ा. (अधिकारी ने हैरत जताई !)
लल्लू जी : सर फैक्स मिलते ही मैंने सारे कर्मचारियों और अधिकारीयों को मतदान के दिन के लिए छुट्टी दे दी. और सख्त आदेश भी जारी कर दिया कि अगर एक भी कर्मचारी इस आदेश का उल्लंघन करेगा तो उसे कडा दंड दिया जायेगा. छुट्टी मिल जाने के कारण कोई भी मतदान कर्मी बूथ नहीं जा सका. लोग जब बूथ पर मतदान के लिए पहुंचे तो वहाँ ताले लटके मिले. वोट इसी कारन नहीं पड़े होंगे (लल्लू जी ने मासूमियत दिखाई!)... :
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें