लल्लू रिटर्निंग आफिसर मल्लू एसपी से- यार तुम इतने कंजूस कैसे हो सकते हो ?
मल्लू जी - मैंने क्या कर दिया भाई, मुझे कंजूस क्यों बोल रहे हो ?
लल्लू जी - कंजूस न कहूँ तो क्या कहूँ... इतनी गर्मी मे भी पंखे नहीं चला रहे !
मल्लू जी - नहीं भाई। चुनाव के कारण ही नहीं चला पा रहा हूँ।
लल्लू जी - अगर तुम व्यस्त हो तो कहो तो मैं अपना चपरासी भेज कर तुम्हारा पंखा दुरुस्त करवा सकता हूँ।
मल्लू जी - नहीं भाई ऐसी बात नहीं। पंखा पंखा ठीक है।
लल्लू जी - बिल ज्यादा आने लगा है क्या?
मल्लू जी - नहीं भाई, नाचता पंखा एक प्रत्याशी का चुनाव चिन्ह है !
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मित्रों ! लल्लू रिटर्निंग आफिसर के कुछ किस्से तो आप सुन चुके हैं। एक दिन लल्लू जी को किसी कारण मल्लू एसपी के यहाँ जाना पड़ा। मैं भी उनके साथ हो लिया। दोनों की बात सुनकर लगा कि ये दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। आप क्या कहते हैं? :)
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